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मैं शामों को अक्सर ही तुम्हारी आवाज़ मिस करती हूँ

मैं शामों को अक्सर ही तुम्हारी आवाज़ मिस करती हूँ तुम्हारी बातें मुझे ऐसे याद हैं जैसे 'ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार' नर्सरी राइम मैं भले ही बुड्ढी हो जाऊँ भले ही यादाश्त कम हो जाए लेकिन अक्सर शामों को तुमसे की हुई बातें तुम्हारी आवाज़ मैं शायद ही कभी भूलूँ मैं शायद ही..!

हारे हुओं का सहारा है उम्मीद

हारे हुओं का सहारा है उम्मीद जीते हुए उम्मीद नहीं किया करते!

'हिज्र के साथी'

'हिज्र के साथी' तुम्हे बिन बताए तुम्हारी आवाज़ जो रिकॉर्ड कर ली थी वो बातें, वो लता, रफ़ी के गाने सेव्ड चैट्स..! मेरे आँसूं, तुम्हारी ग़ज़लें इन सबके साथ साथ ये सितारे जिन्हें देखकर तुम्हारी शक्ल बनाती हूँ ये भी मेरे हिज्र के साथी हैं और हाँ...! इनके बिछड़ने का डर भी नहीं!

एक हसरत थोड़ी पुरानी जंग लगी

एक हसरत थोड़ी पुरानी जंग लगी एक ख़्वाब बिल्कुल ताज़ा खिला हुआ बैठे हुए थे फ़ुरसत में बातें किए जाते थे उस हसरत को ताज़ा ख़्वाब ने ऐसा झांसा दिया ...ऐसा झांसा दिया कि अब वो हसरत जंग लगा पैकर छोड़ नया रूप धरना चाहती है क्या ये मुमकिन है? ऐ ख़्वाब क्या ये वाक़ई मुमकिन है??

'केसरिया बालमा' इक तस्वीर

'केसरिया बालमा' इक तस्वीर जिसे वक़्त ने ज़र्द कर दिया जिसे तकते तकते मेरी आँखें भी ज़र्द हो आईं अब ये ज़र्द रंग मेरे जिस्म में उतर रहा है डॉक्टर कहते हैं,एनीमिया है! इन्हें नहीं मालूम, तुम्हारी केसरिया रंग की कमीज़ वाली तस्वीर मेरी ब्लड रिपोर्ट नार्मल कर देगी तुम भेजोगे न?

उसकी आंखें नैया जैसी

उसकी आंखें नैया जैसी उसकी हर इक बात समन्दर!

उसने कहा ख़ुशबू क़ैद नहीं होगी

उसने कहा ख़ुशबू क़ैद नहीं होगी मैनें इतर बनाया उसने कहा आवाज़ को बांधो तो जानू मैनें रिकॉर्डर ऑन किया! उसने कहा मुझे पकड़ो, छू के दिखाओ मैनें तस्वीरें खींची! अब कहता है, किस्मत बदलो तो बात बने और मैं अकेली इतर में नहाई उसकी तस्वीर को निहारते हुए उसकी आवाज़ सुन रही हूँ!

जिस्म में फंसी लड़की / @jaunsee

जिस्म में फंसी लड़की कंकाल में फंसे दिल को ज़ब्त करना सिखाती है हर रोज़.....!

ये पूरबी हवा का झोंका / @jaunsee

ये पूरबी हवा का झोंका जो हौले से बह रहा है ये झोंका सहला रहा है मुझे मैं हर साँस भीतर भर रही हूँ इसे ये मुझे हर सम्त से महका रहा है मैं रेत के मानिन्द इसमें घुलकर बिखरना चाहती हूँ पर ये लौट जायेगा! और मैं ज़िन्दा रहूँगी पहले जैसे क्या सिर्फ़ साँस लेते रहना ही ज़िन्दगी है?

Female / वो कौन था जिसने पहला पिंजरा बनाया

'Female' मुझे उस पहले पिंजरे से ख़ौफ़ है वो कौन था जिसने पहला पिंजरा बनाया किसी को क़ैद करने के ख़्याल से उसकी रूह नहीं काँपी आज़ादी को क़ैद कैसे किया क्या आज़ाद रूहों ने क़ैद का विरोध नहीं किया आख़िर कब तक पिंजरे बनते रहेंगे आख़िरी पिंजरा बनाओ और ख़त्म करो ये सब!

आपकी याद का सिक्का @jaunsee

आपकी याद का सिक्का मैनें संभाल कर दुपट्टे में बांधा हुआ है अक्सर एक ख़्वाब मेरी पसन्द का रोज़ाना सहला के जाता है मैं इस सिक्के को दुपट्टे से खोलकर दाहिनी हथेली से हर रात माथे पर सजा लेती हूँ! ये सिक्का मेरी सियाह रात सी ज़िन्दगी का चाँद बन कर चमकता है आपकी याद का सिक्का! #मैं

रमज़ान मुबारक

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@jaunsee

हिज्र का शहद

हिज्र का शहद  तुम्हारी यादें शहद की मक्खी जैसी हैं कानों की लौ के पास भिनभिनाती हैं मुझे काट के जाती हैं! गर्दन पर कभी , कभी होंटों पर !! ये उन लम्हो पे जा जा के उनका रस पीतीं हैं जो हमने साथ गुज़ारे थे ! और बुन लेतीं हैं एक बड़ा सा छत्ता ! यादों का छत्ता ! जिसमें तुम्हारे हिज्र का शहद बनता है ! ये शहद मेरी नसों में बहता है लहू के साथ ! जाने मेरी कितनी ही बीमारियों का ईलाज है ये शहद तुम्हारे हिज्र का शहद !!

मैं नहीं करुँगी स्वीकार

मैं नहीं करुँगी स्वीकार इस बार..... अपना व तुम्हारा प्यार ! इस हार का हार है मुझको नागवार ऐ मेरे हम कनार ! मैं नहीं करुँगी स्वीकार इस बार..... क्योंकि जब जब मैंने स्वीकारा है किसी से अपने प्यार को तब तब मैंने पक्का किया उस रिश्ते की हार को आहिस्ता आहिस्ता खोया है प्यार के अहसास को और फिर ज़िन्दा किया है एक अनमिट प्यास को ये मुस्लसल प्यास ये दरमियान के सिलसिले इस बार हरगिज़ मिटेंगे नहीं ख़्वाहिशों के क़ाफ़िले इस बार नहीं मानूँगी हार मैं नहीं करुँगी स्वीकार अपना व तुम्हारा प्यार !

ये मेरा ख़्वाब है

ये मेरा ख़्वाब है हाँ ये मेरा ख़्वाब ही तो है एक वीरान कमरे में जिसकी दीवारों पे ताज़ी पुताई है खाली पिंजरे की तस्वीर लगाई है मेज पे इक खाली गिलास पड़ा है जिसपे चांदी सा रंग चढ़ा है एक सियाह चादर पे, एक सुफ़ैद गुलाब है साथ में जौन एलिया की "शायद" किताब है !!! मैं बेलिबास , बे हवास पड़ी हूँ वहां मौन सी 'तुम' ग़ज़लें पढ़ कर के , सुना रहे हो जौन की एक फ्लॉवर पोट, गिर के छन से फूट गया ! ये मेरा ख़्वाब था , टूटना था, टूट गया ! अब इस वीरान कमरे में मैं हूँ सफ़ेद चादर पर और सियाह गुलाब है मेरे जौन एलिया की पसन्दीदा किताब है ! ग़ज़लें पढ़ रही हूँ मैं, इस वीरान कमरे में साँसे गिन रही हूं मैं, इस वीरान कमरे में !! साँसे गिन रही हूं मैं, इस वीरान कमरे में !!

एक बंजारन गेरुए रंग का दुप्पट्टा ओढ़े

एक बंजारन गेरुए रंग का दुप्पट्टा ओढ़े सर पे माज़ी की गठरी उठाये उसी गली में जाना चाहती है जहां से वो ये गठरी ढो के लायी थी ये बोझ वहीं खाली कर के आना चाहती है और वहां से अपना कँगन लेके आएगी इस बार वो कँगन जो उस गली के दो मंजिला मकान के ऊपर वाले कमरे में मेज़ पर छूट गया ! लेकिन हर बार कमरा अंदर से बंद मिलता है और हताश बंजारन माज़ी की गठरी उठाये फिरती रहती है ....फिरती रहेगी ! जब तक उम्र का शहर पार नहीं हो जाता ....

'तीन का पहाड़ा'

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असरार ए हस्ती वो मोनार्च तितली जो

असरार ए हस्ती वो मोनार्च तितली जो लार्वा से प्यूपा बनी उसको टोका गया ! और अब वो प्यूपा से ख़ूबसूरत मोनार्च तितली बन चुकी है अब वो उड़ेगी तेज़ी से दूर गगन में अपनी पसन्द के फूल का रसपान करेगी लाख रोका करे कोई !

आख़िरी ख़्याल

तवील रातों में , मेरे ज़हन में ठीक नींद से पहले ये जो आख़िरी ख़्याल आता है मैं सच कहती हूँ ! आज तीन साल बाद भी वही है जो तीन साल पहले था ! हाँ पागल !!! सच में तुम ! क़सम से तुम !! बस कह दिया "तुम" !!!

नहीं पता था कि ये इस तरह सताएगी

नहीं पता था कि ये इस तरह सताएगी तुम्हारी याद मुझे ला मकां बनायेगी  नहीं कहीं भी नहीं कोई ख़्वाब-गाह अपनी तुम्हारी आँख मुझे आसरा दिलाएगी !!

अश्कों से बारिश

अश्कों से बारिश लिक्खा है तुमको ये सब कब दिखता है !